6.6.22

P-101 क्यों कोई

क्यों न कोई हो जाए बेगाना,
ख़ारज़ार जब होगया ये ज़माना।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-101

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...