तुम बस ज़रा सा मुस्कुरा दो,
मैं तुम्हारे दिल की बात समझ लूंगा,
थोड़ा करीब से गुज़र जाओ,
मैं उसको ही मुलाक़ात समझ लूंगा।
मैं तुम्हारे दिल की बात समझ लूंगा,
थोड़ा करीब से गुज़र जाओ,
मैं उसको ही मुलाक़ात समझ लूंगा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-068
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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