3.6.22

M-035 उसे क्या समझेंगे

उसे क्या समझेंगे हम यार,
ख़ुद को ही न समझ पाए,
मिली न इबरत हादसों से,
बार बार ठोकरें  हम खाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  M-035

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