कभी उनकी आंखों में बसते हैं हम,
कभी उन्हीं आंखों में खटकते हैं हम,
ये कैसा पैमाना हैं उनकी आंखों का,
कभी दोस्त कभी दुश्मन लगते हैं हम।
कभी उन्हीं आंखों में खटकते हैं हम,
ये कैसा पैमाना हैं उनकी आंखों का,
कभी दोस्त कभी दुश्मन लगते हैं हम।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-034
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