3.6.22

T-020 इंसाँ की तमन्ना

इंसाँ की तमन्ना है,
जब जब उसका मिजाज़ बदले, 
दुनियाँ भी उसीके हिसाब बदले। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-020

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...