19.6.22

S-147 तेरी बेरुखी ने

तेरी बेरूखी ने मेरा और तो कुछ बिगाड़ा नहीं,
फ़क़त शराफ़त पर से मेरा एतमाद उठा दिया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-147

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...