19.6.22

S-148 कोई ग़मगीन उदास

कोई ग़मगीन उदास ख़ामोश बैठा है,
कौन जाने वो कितने ग़म पिए बैठा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-148

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