19.6.22

S-150 चंद दिनों में

चंद दिनों में अपनी सी पर आगई अपनी ज़िन्दगी,
बड़ी मुकम्मल सी जो हमे लगने लगी थी ज़िन्दगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-150

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...