16.6.22

S-145 आंधियों, तुम्हें

आंधियों, तुम्हें खुश न होने दूंगा मैं,
लो मैने ख़ुद ही बुझा दिए चराग़ अपने।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-145

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