10.6.22

P-104 इतने भी कांटे

इतने भी कांटे ना बिछाओ मेरे रास्तों में,
तुम्हे भी चलना पड़ सकता है उन्ही राहों में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-104

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