23.6.22

P-120 ऐ दोस्त ज़रा

ऐ दोस्त ज़रा दुरुस्त कर ले शऊर तेरा,
जाने कौन कब कहां तोड़ दे ग़रूर तेरा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-120

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