23.6.22

P-121 एक शाम ने

एक शाम ने जबसे हमे बदनाम किया है,
तबसे ज़िन्दगी में अब कोई शाम होती नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-121

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