2.6.22

M-033 कोई दुश्मन नहीं

कोई दुश्मन नहीं बनता,
हम दुश्मन बना लेते हैं।
कोई सर पर नहीं चढ़ता,
हम ही उसे चढ़ा लेते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी M-033

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...