ये ख़ुशफहमी न पाल लेना, तुम्हारी आरज़ू है।
हमे तो महज़ तजुर्बों में इज़ाफ़े की जुस्तजू है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-137
हमे तो महज़ तजुर्बों में इज़ाफ़े की जुस्तजू है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-137
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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