पैंतरा बदलने का हुनर न आया हमे,
हर सूरत हर हाल में हम निभाते रहे।
आख़िर उन्हीं ने किया बदनाम हमे,
रुसवाइयों से जिनको हम बचाते रहे।
हर सूरत हर हाल में हम निभाते रहे।
आख़िर उन्हीं ने किया बदनाम हमे,
रुसवाइयों से जिनको हम बचाते रहे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-069
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