30.11.22

S-205 मैं तेरे ज़हन का

मैं तेरे "ज़हन का एक फ़िज़ूल" सा सवाल रहा,
पर ताज्जुब है तेरे ज़हन में कैसे इतने साल रहा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-205

29.11.22

M-043 तुमने समस्या का

तुमने समस्या का हल नहीं निकाल लिया,
बस एक ख़ुश-फ़हमी को है पाल लिया,
जो चले थे पत्नी को पालतू बनाने को,
उन्होंने अपने ही गले मे पट्टा डाल लिया।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-043 

T-028 ऐसे दोस्तों से हम

ऐसे दोस्तों से बाज़ हम आ गए,
जो ख़ुद तो दुश्मन बने ही बने,
औरों को भी दुश्मन बना गए।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-028

S-204 सच है, सच्चा प्यार

सच  है, सच्चा प्यार करने वाले दुनियाँ में अभी रहे नहीं,
मगर सच्चे प्यार के मुस्तहैक भी दुनियाँ में कभी हुए नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-204

28.11.22

S-203 ख़ुदा की रहमत

ख़ुदा की रहमत पर एतबार कर,
हिज्र में भी वस्ल का इंतज़ार कर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-203

M-042 अब रिहाई की

अब रिहाई की तमन्ना कौन करे,
रिश्वत में रुपया बर्बाद कौन करे,
जब जेल ही बन जाये जन्नत तो,
बाहर आने की हिमाकत कौन करे।

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-042  
               

S-202 तब लगता था

तब लगता था वक़्त इतना भागा क्यों जा रहा है,
और अब शिकायत है वक़्त थमता क्यों जा रहा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-202

24.11.22

T-027 परेशान रहना

परेशान रहना आदत बन गई है,
खुद ही से पूछा  करता हूँ,
आज मैं परेशान क्यों हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-027

S-201 यूं तो

यूं तो दुनियाँ में जीने के लिए अब रक्खा क्या है,
चंद ख्वाहिशें ही हैं, ज़िंदा जिन्होंने रक्खा हुआ है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-201

23.11.22

P-168 कोई दौर आकर

कोई दौर आकर ठहरा नहीं, ये भी ठहरेगा नहीं,
वक़्त बुरा है अगर तो ये न सोचो, गुज़रेगा नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-168

P^167 थोड़ा सा मतलबी

थोड़ा सा मतलबी होना तो बुरा नहीं, सभी स्वार्थी हैं,
मगर बुरे हैं वो जो इस हुनर में ज़्यादा ही महारथी हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-167
                  

S-200 "अजनबी" तुझको

"अजनबी" तुझको मालूम है वो बेवफ़ा नहीं,
पर येभी वाज़े है उसे इश्क़ का सलीका नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-200

21.11.22

S-199 बेवफ़ा, तुझे

बेवफ़ा, तुझे कब का भुला दिया होता,
गर कोई तेरा हमनाम हमशक्ल न हुआ होता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-199

P-166 प्रेम अदावतों

प्रेम अदावतों, नफ़रतों, फ़ासलों से कम नहीं होता

हालात के वार से भी कभी जड़ से ख़त्म नहीं होता।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-166

Q-084 नाबूद हो गए

नाबूद हो गए तमाम जज़्बात,
न रही वो बात न वैसे हालात,
दूर तक
 छाई है वीरानगी सी,
ख़त्म हो गई हो जैसे कायनात।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-084

20.11.22

Q-083 तुझसे रिश्ता

तुझसे रिश्ता भी बड़ा अजीब है,
तू जितना है दूर उतना करीब है,
तुझसे शिकायतें तो बड़ी हैं मुझे,
पर चुप रह जाना मेरा नसीब है।

- वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" Q- 083

15.11.22

P-165 उसका कौन होगा

उसका कौन होगा, जो ख़ुद किसी का हो न सका।
बनाता रहा दुश्मन सबको पर दोस्त किसी का हो न सका।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-165

14.11.22

P-164 खुशियां न भी हों

खुशियां न भी हों तो हर्ज नहीं, कुछ दर्द होने ज़रूरी हैं,
वरना तो एक इंसान दूसरे इंसान का दर्द समझेगा नहीं। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-164

P-163 दफा करो जी,

दफ़ा करो जी,  अगर जो ज़्यादा देर बीन बजाओगे, 
भैंस पर असर पड़ेगा नहीं, नागिन से दो- चार हो जाओगे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-163
                   

P-162 बदलते दौर में

बदलते दौर में शायद कोई कमी सी रह गई है मुझमें,
जो अब भी अपनेपन की उम्मीद सी जगी रह गई है मुझमें।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-162

13.11.22

S-198 बहुत समझाया

बड़ा समझाया बुझाया पर समझता ही नहीं,
टूटा हुआ ये दिल कहीं और लगता ही नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-198

12.11.22

S-197 ग़लतियों पर ग़लतियाँ मैं

ग़लतियों पर गलतियाँ मैं करता ही चला गया,
काश, कोई बेवफ़ा मुझे पहले मिल गया होता।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-197

11.11.22

S-196 तासीर-ज़ायका

तासीर-ज़ायका बना रहे इसके लिए चाय ठंडी होने न दो, 
इब्तदाई मिठास बनी रहे इसके लिए ठंड रिश्तों में भी ठंड होने न दो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-196

10.11.22

S-195 बड़ी अजीब से

बड़ी अजीब सी फ़ितरत है मेरी ख़ुशी की,
बन जाती है ग़म भी, है अपनी मर्ज़ी की।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-195

S-194 "अजनबी" तूने

"अजनबी" तूने ज़िन्दगी में ऐसी कौन सी भूल की,
कि हर छोटी खुशी ने तुझसे कीमत बड़ी वसूल की।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-194

9.11.22

S-193 ऐ दोस्त, तुम भी

ऐ दोस्त, तुम भी आख़िर "भीड़" जैसे निकले,
ये बात और है भीड़ से कुछ अलग से निकले।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-193

P-161 ज़िन्दगी तो दोबारा

ज़िन्दगी तो तुझे देनी नहीं मुझे दोबारा ऐ ख़ुदा,
फिर क्यों मेरे तजुर्बों में इज़ाफ़ा किये जा रहा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-161

8.11.22

P-160 इतना भी ना

इतना भी ना किसी से इश्क़ हो जाए,
कि वो शख़्स आदत से 'तलब 'हो जाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-160

P-159 कहीं ज़मीं नहीं मिलती

"कहीं ज़मीं नहीं मिलती तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता,"
अगर दोनों मिल भी जाएं तो जहां में सुकूँ नहीं मिलता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-159

P-158 जब तेरे ही हाथ मे

जब तेरे ही हाथ मे है सब कुछ ऐ खुदा,
तो एकबार देके छीनता क्यों है ये बता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-158

7.11.22

P-157 कभी क्रोध आता है

कभी क्रोध आता है, कभी प्यार आता है,
यह कैफ़ियत है क्या, समझ नहीं आता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-157

T-026 कभी शब्द

 कभी शब्द कम पड़ जाते हैं, 
कभी बन्धन आड़े आ जाते हैं, 
उदगार यूंही अधूरे रह जाते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-026

Q-082 हर दम दिल पतंग

हर दम दिल पतंग जैसा रहता है,
किसी की डोर से बंधा सा रहता है,
कटफट जाता है उलझ उलझ कर,
फिरभी बेचारा फड़कता रहता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" - Q-082

S-192 मैने कहा वक़्त से

मैंने कहा वक़्त से मेरे भी ज़ख़्म भरने दे,
वह बोला मैं अभी तेरा नहीं, तेरा होने दे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-192

6.11.22

S-191 क्यों हारकर

क्यूं न हारकर लौट आता मैं,

अपनों से कैसे जीत पाता मैं।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-191

P-156 दिन ब दिन रफ्ता-रफ्ता

दिन ब दिन रफ्ता-रफ्ता दूर होते जा रहे हैं हम,
कौन जाने कौन सी सज़ा पाये जा रहे हैं हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-156

S-190 आपका बस नज़र

आपका नज़र मिलाना ही क़ातिलाना था,
मुस्कुरा कर कहर क्यों ढहा दिया आपने।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-190

5.11.22

P-155 बड़ा शातिर है

बड़ा शातिर है इंसान फ़ितरत से अपनी,
उड़ती पतंग को खींच लेता है ढील देकर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-155

S-189 जब आपकी आंखों


आपकी आंखों की सिफ़त है हक़ीक़त बताने की,
यूंही ज़हमत न उठाओ मसनुई बेरुखी दिखाने की।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-189


4.11.22

M-041 ज़िन्दगी कितनी

ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है,
अगर कायम उसमें तेरी मूरत है,
मुझे ख़ुदा से और न कुछ चाहिए,
तूही मेरी हसरत तूही मेरी ज़रूरत है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-041

3.11.22

S-188 भले ही खटकता हूँ

भले ही मैं खटकता हूँ पर तेरी आँखों मे तो हूँ,
अब तेरे ख्वाबों में न सही, तेरी यादों में तो हूँ।   
  
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-188            

Q-081 जो इशारे को

जो इशारे को नहीं समझता,
वो मुशायरे को नहीं समझता,
जिसने ख़ुद को ही न समझा,
वो हमारे को नहीं समझता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-081

Q-080 तब भी ख्यालों में

तब भी ख्यालों में ही जीते थे हम,
अब भी ख्यालों में जी लेंगे हम।
नज़दीकियों में भी कहाँ सुकूँ था,
दूरियों में ग़म के घूंट पी लेंगे हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-080

S-187 अबकी बार क्यों हैं

अबकी बार क्यों इतने सर्द हैं रिश्ते,
गई सर्दियों में तो बड़े गर्म थे रिश्ते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-187

2.11.22

P-154 झूंटा घमंड

झूंटा घमंड एक नापायेदार नाज़ुक सी चीज़ है, 
टूट कर पल में चूर चूर हो जाने वाली चीज़ है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-154

S-186 मेरे ये अज़ीज़ ज़ख़्म

मेरे अज़ीज़ ज़ख़्म मुरझाए हुए अच्छे नहीं लगते,
इन्हें भी तरो-ताज़ा रखने लगा हूँ मैं पौधों की तराह।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-186

1.11.22

P-153 तय कर दी जातीं

तय कर दी जाती हैं कसौटियां औरों के लिए,
खुद की बारी पर उसूल बदल जाया करते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-153

S-185 बेवफा, चल तू भी

बेवफा, चल तू भी सुकून में हो जा अब,
आखिर हार कर मैने भी वफ़ा छोड़ दी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-185

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...