6.11.22

S-190 आपका बस नज़र

आपका नज़र मिलाना ही क़ातिलाना था,
मुस्कुरा कर कहर क्यों ढहा दिया आपने।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-190

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...