5.11.22

P-155 बड़ा शातिर है

बड़ा शातिर है इंसान फ़ितरत से अपनी,
उड़ती पतंग को खींच लेता है ढील देकर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-155

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...