6.11.22

P-156 दिन ब दिन रफ्ता-रफ्ता

दिन ब दिन रफ्ता-रफ्ता दूर होते जा रहे हैं हम,
कौन जाने कौन सी सज़ा पाये जा रहे हैं हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-156

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