28.11.22

M-042 अब रिहाई की

अब रिहाई की तमन्ना कौन करे,
रिश्वत में रुपया बर्बाद कौन करे,
जब जेल ही बन जाये जन्नत तो,
बाहर आने की हिमाकत कौन करे।

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-042  
               

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