11.11.22

S-196 तासीर-ज़ायका

तासीर-ज़ायका बना रहे इसके लिए चाय ठंडी होने न दो, 
इब्तदाई मिठास बनी रहे इसके लिए ठंड रिश्तों में भी ठंड होने न दो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-196

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K-007 सूरज को मैं

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