ग़लतियों पर गलतियाँ मैं करता ही चला गया,
काश, कोई बेवफ़ा मुझे पहले मिल गया होता।
काश, कोई बेवफ़ा मुझे पहले मिल गया होता।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-197
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment