10.11.22

S-195 बड़ी अजीब से

बड़ी अजीब सी फ़ितरत है मेरी ख़ुशी की,
बन जाती है ग़म भी, है अपनी मर्ज़ी की।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-195

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