14.11.22

P-162 बदलते दौर में

बदलते दौर में शायद कोई कमी सी रह गई है मुझमें,
जो अब भी अपनेपन की उम्मीद सी जगी रह गई है मुझमें।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-162

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