4.11.22

M-041 ज़िन्दगी कितनी

ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है,
अगर कायम उसमें तेरी मूरत है,
मुझे ख़ुदा से और न कुछ चाहिए,
तूही मेरी हसरत तूही मेरी ज़रूरत है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-041

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K-007 सूरज को मैं

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