3.11.22

Q-081 जो इशारे को

जो इशारे को नहीं समझता,
वो मुशायरे को नहीं समझता,
जिसने ख़ुद को ही न समझा,
वो हमारे को नहीं समझता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-081

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...