3.11.22

Q-080 तब भी ख्यालों में

तब भी ख्यालों में ही जीते थे हम,
अब भी ख्यालों में जी लेंगे हम।
नज़दीकियों में भी कहाँ सुकूँ था,
दूरियों में ग़म के घूंट पी लेंगे हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-080

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K-007 सूरज को मैं

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