तब भी ख्यालों में ही जीते थे हम,
अब भी ख्यालों में जी लेंगे हम।
नज़दीकियों में भी कहाँ सुकूँ था,
दूरियों में ग़म के घूंट पी लेंगे हम।
अब भी ख्यालों में जी लेंगे हम।
नज़दीकियों में भी कहाँ सुकूँ था,
दूरियों में ग़म के घूंट पी लेंगे हम।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-080
No comments:
Post a Comment