8.11.22

P-159 कहीं ज़मीं नहीं मिलती

"कहीं ज़मीं नहीं मिलती तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता,"
अगर दोनों मिल भी जाएं तो जहां में सुकूँ नहीं मिलता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-159

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...