कोई दौर आकर ठहरा नहीं, ये भी ठहरेगा नहीं,
वक़्त बुरा है अगर तो ये न सोचो, गुज़रेगा नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-168
वक़्त बुरा है अगर तो ये न सोचो, गुज़रेगा नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-168
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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