14.11.22

P-164 खुशियां न भी हों

खुशियां न भी हों तो हर्ज नहीं, कुछ दर्द होने ज़रूरी हैं,
वरना तो एक इंसान दूसरे इंसान का दर्द समझेगा नहीं। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-164

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...