7.11.22

T-026 कभी शब्द

 कभी शब्द कम पड़ जाते हैं, 
कभी बन्धन आड़े आ जाते हैं, 
उदगार यूंही अधूरे रह जाते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-026

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K-007 सूरज को मैं

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