30.3.22

P-076 ज़ख़्म किसने दिया

ज़ख़्म किसने दिया, सज़ा किसने पाई,
फ़नाह हुआ वही,दोस्ती जिसने निभाई।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-076

26.3.22

Q-052 आला-ऐ-क़त्ल

आला-ऐ-क़त्ल भी नहीं रखते कोई,
जान ले लेते हैं महज़ मुस्कुरा कर।
ढूंढना भी नहीं पड़ता शिकार को,
वो ख़ुद आ जाता है सर झुका कर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-052

21.3.22

S-105 अक्सर ही मुझे

अक्सर ही मुझे बड़ा हसीन गुमाँ होता है,
कि गुनाहगार, मेरे सिवा हर इंसाँ होता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-105

20.3.22

S-103 बिगड़ा है और भी

बिगड़ा है और भी ज़ियादा ये दिल,
जब जब संभालने की कोशिश की है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-103

19.3.22

P-075 हड्डियों को तो

हड्डियों को तो एक दिन जल ही जाना है,
टूटने दो इन्हें, गर प्यार में टूट ही जाना है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-075

18.3.22

Q-051 टूटकर भी टूटता

टूटकर भी टूटता नहीं ताल्लुक,
ये कैसा अजीब हिज्र हमारा है।
तन्हा-तन्हा ज़िन्दगी गुज़ारें हम,
ये भी तो आपको नहीं गवारा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-051

13.3.22

S-103 मेरे दोस्त

मेरे दोस्त हर हाल में मुझे पहचान लेते हैं,
मैं हंसता भी हूँ अगर तो मेरा दर्द जान लेते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-103

S-102 पहली सी न सही

पहली सी न सही, कुछ तो नज़रें इनायत बनाए रखिये मुझपे,
कि भरम टूट न जाए मेरा, कभी आपको मुहब्बत थी मुझसे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-102


12.3.22

P-074 बेचैन करके

बेचैन करके पूछते हो उदासी का सबब हमसे

क्या बताएं हम , हम ही नाराज़ हैं अब हमसे।



-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-074


P-073 कितना न्यारा है

कितना न्यारा है, स्वभाव हमारा तुम्हारा,
वक्त की मानिंद बदले सुर हमारा तुम्हारा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-073

10.3.22

P-072 वादा तो करते हैं

वादा तो करते हैं लोग, पर कोई दर्द साझा नहीं करता,
कभी वह भी हो जाता है हमदर्द जो वादा नहीं करता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-072

9.3.22

P-071 मेरा ये मासूम दिल

मेरा ये मासूम दिल कुछ उल्टा ही चलता है,
जो हो गया बेवफ़ा उसी के लिए मचलता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-071

5.3.22

M-027 इंसाँ अकेला

 इंसाँ अकेला ही जी रहा है,
और अकेला ही मर रहा है,
ये न कहो लोग बदल रहे हैं,
यह तो युग ही बदल रहा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-027

3.3.22

Q-050 मैंने तुझको जीने

मैंने तुझको जीने का सोचा ही नहीं,
ऐ ज़िन्दगी तुझ से बहुत बेज़ार हूँ मैं।
मैने तुझसे कोई क़र्ज़ लिया ही नहीं,
बता दे फिर क्यों तेरा कर्ज़दार हूँ मैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-050

S-101 ज़िन्दगी का बस

ज़िन्दगी का बस उतना ही वक्त अच्छा गुज़र जाता है,
जितना तेरे ख़्वाब और तसव्वुर में वक़्त मेरा गुज़र जाता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-101

2.3.22

P-070 माना ज़िन्दगी

माना ज़िन्दगी वक़्त की क़ैद में है "अजनबी"
मगर कोई भी क़ैद क़यामत तक नहीं होती।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-070

1.3.22

S-100 वो ताल्लुक

वो ताल्लुक़ वो सिलसिले सब ख़त्म हो गए धीरे धीरे,
फिरभी मगर आजतक ख़त्म नहीं हुए चर्चे मेरे तेरे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-100

P-069 प्यार से भी

प्यार से भी बढ़ कर दर्जा है यादों का,
प्यार कभी खो जाता है पर यादें नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-069

T-017 मुझको यह

मुझको यह मालूम था ही नहीं,
मनचाहा प्यार मिलता ही नहीं।
मिल जाए, तो टिकता ही नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-017

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...