ज़ख़्म किसने दिया, सज़ा किसने पाई,
फ़नाह हुआ वही,दोस्ती जिसने निभाई।
फ़नाह हुआ वही,दोस्ती जिसने निभाई।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-076
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
बेचैन करके पूछते हो उदासी का सबब हमसे
क्या बताएं हम , हम ही नाराज़ हैं अब हमसे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-074
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...