18.3.22

Q-051 टूटकर भी टूटता

टूटकर भी टूटता नहीं ताल्लुक,
ये कैसा अजीब हिज्र हमारा है।
तन्हा-तन्हा ज़िन्दगी गुज़ारें हम,
ये भी तो आपको नहीं गवारा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-051

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