26.3.22

Q-052 आला-ऐ-क़त्ल

आला-ऐ-क़त्ल भी नहीं रखते कोई,
जान ले लेते हैं महज़ मुस्कुरा कर।
ढूंढना भी नहीं पड़ता शिकार को,
वो ख़ुद आ जाता है सर झुका कर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-052

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