2.3.22

P-070 माना ज़िन्दगी

माना ज़िन्दगी वक़्त की क़ैद में है "अजनबी"
मगर कोई भी क़ैद क़यामत तक नहीं होती।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-070

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K-007 सूरज को मैं

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