12.3.22

P-074 बेचैन करके

बेचैन करके पूछते हो उदासी का सबब हमसे

क्या बताएं हम , हम ही नाराज़ हैं अब हमसे।



-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-074


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