पहली सी न सही, कुछ तो नज़रें इनायत बनाए रखिये मुझपे,
कि भरम टूट न जाए मेरा, कभी आपको मुहब्बत थी मुझसे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-102
कि भरम टूट न जाए मेरा, कभी आपको मुहब्बत थी मुझसे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-102
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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