कितना न्यारा है, स्वभाव हमारा तुम्हारा,
वक्त की मानिंद बदले सुर हमारा तुम्हारा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-073
वक्त की मानिंद बदले सुर हमारा तुम्हारा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-073
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment