वादा तो करते हैं लोग, पर कोई दर्द साझा नहीं करता,
कभी वह भी हो जाता है हमदर्द जो वादा नहीं करता।
कभी वह भी हो जाता है हमदर्द जो वादा नहीं करता।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-072
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment