शराब फिर भी बेहतर है जो चढ़ कर उतर तो जाती है,
आपकी ज़िद की तरह नहीं कि चढ़ जाए तो उतरती नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-300
आपकी ज़िद की तरह नहीं कि चढ़ जाए तो उतरती नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-300
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
रफ़्ता-रफ़्ता वो किसी के दिल का सामां हो गए
जाने कब शादी कर ली और, हम मामा हो गए।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-297
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...