19.12.23

Q-148 ऐ हवाओं इधर से

ऐ हवाओं इधर से न गुज़रो, 
यहां इक दीवाने की राख़ पड़ी है।
ख़ाक़ हो गया था वो यहां,
आज बस उसकी याद पड़ी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-148


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