"आत्म-ग्लानि", "आत्म-कुंठा" को स्वीकार करने के बजाय दूसरों को ग़लत सिद्ध करना बड़ा अपराध है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-232
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment