एक रात ढलने से रातें ख़त्म नहीं होतीं,
बात बन्द करने से बातें ख़त्म नहीं होतीं,
गुफ़्तगू का कोई सिलसिला रहे बाकी,
इतनी जल्दी मुलाकातें ख़त्म नहीं होतीं।
बात बन्द करने से बातें ख़त्म नहीं होतीं,
गुफ़्तगू का कोई सिलसिला रहे बाकी,
इतनी जल्दी मुलाकातें ख़त्म नहीं होतीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-081
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