8.12.23

S-295 मुहब्बत का जज़्बा

मुहब्बत का जज़्बा मौजूद है तुझमें भी, मुझमें भी,
मगर फ़र्क है इतना सा, मैं मानता हूँ इसे, पर तू नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-295

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