जिनकी नींव शको-शुब्हा पर खड़ी होती है।
उन रिश्तों के ढहने की फ़िक्र हर घड़ी होती है।
रोज़मर्रा आते रहते हैं आंधी तूफ़ाँ ओ ज़लज़ले,
उनसे बचाने में इनको मुश्किल बड़ी होती है।
उन रिश्तों के ढहने की फ़िक्र हर घड़ी होती है।
रोज़मर्रा आते रहते हैं आंधी तूफ़ाँ ओ ज़लज़ले,
उनसे बचाने में इनको मुश्किल बड़ी होती है।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" Q-146
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