5.12.23

P-230 बदल गए लोग,

बदल गए लोग, बदल गई दुनियाँ,
ऐ निष्ठुर साल अब तू भी बदल जा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-230

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...