हम ख़ुद ही हो जाते आपकी नज़रों से दूर,
आपने क्यूं उठाई ज़हमत नज़रंदाज़ करने की।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-293
आपने क्यूं उठाई ज़हमत नज़रंदाज़ करने की।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-293
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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