8.12.23

S-293 हम ख़ुद ही हो जाते

 हम ख़ुद ही हो जाते आपकी नज़रों से दूर,
आपने क्यूं उठाई ज़हमत नज़रंदाज़ करने की।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-293

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K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...