26.1.23

Q-089 फूल खिला भी

फूल खिला भी, और जल्द ज़र्द हो गया।
धूप निकली भी पर मौसम सर्द हो गया।
जब-जब आये राहतों के हल्के से झोंके,
हर बार टीस उठी, नया एक दर्द हो गया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-089

24.1.23

S-224 लबों से पी शराब

लबों से पी शराब का नशा तो थोड़ी देर का होता है,
आंखों से की मयकशी का नशा उम्र भर का होता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-224
 

22.1.23

Q-088 तुम्हारी बातों में

तुम्हारी बातों में भी बहुत कशिश थी,
अब ख़ामोशी में भी दिलकशी कम नहीं।
बढ़ रही हैं आपकी भी बेताबियाँ बहुत,
इन दूरियों से आज़िज़ सिर्फ़ हम नहीं।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-088

M-047 मतलब ने ही

मतलब ने ही जोड़ा था,
वोही अब मिलाऐगा भी।
मतलब ने ही तोड़ा था,
वोही फिरसे जोड़ेगा भी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-047

21.1.23

S-223 दुश्मनों को भी

 दुश्मनों को भी आ जाता है रहम कभी-कभी,

अपनों में मगर ये गुंजाइश भी नहीं हुआ करती।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-223

15.1.23

M-046 बड़े तजुर्बे किये

बड़े तजुर्बे करके बैठे हैं,
बहुत कुछ खोके बैठे हैं, 
शिकायत नहीं किसी से,
पास अपने किये के बैठे हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-046

14.1.23

S-222 बड़ा दिली सुकून

बड़ा दिली सुकून ज़िन्दगी में आया है,
जब से बेवफ़ा को दिल से भुलाया है।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-222

11.1.23

Q-087 कभी तरसते थे

कभी तरसते थे धूप को, अब धूप अच्छी नहीं लगती,
कभी ढूंढते थे ज़रासी छांव,अब छांव अच्छी नहीं लगती,
कभी मांगते थे उम्र लंबी, ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती। Q-087

- वीरेंद्र सिन्हा अजनबी" Q-087

8.1.23

T-031 दिल चूर चूर

दिल चूर चूर हो जाता है, 
जब कोई अपना गैरों की मानिंद,
सामने से गुज़र जाता है। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-031

M-045 कुछ लोग खूबसूरत

कुछ लोग खूबसूरत होते हुए भी अच्छे नहीं लगते।
सब कुछ होते हुए भी उनसे रिश्ते पक्के नहीं लगते।
नकली मुस्कान, नकली प्यार, नकली चेहरा दीखता है,
वो बेचारे कहीं से भी हमारे 'अपने' सच्चे नहीं लगते।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-045

7.1.23

S-221 उड़ लो आसमाँ में

उड़ लो आसमाँ में मगर आना तो
होगा ज़मीं पर ही,
हमने देखा नहीं है कब्रों को
आसमाँ में खुदते हुए ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-221

S-220 हो अगर ख़ौफ़े रुसवाई

हो अगर ख़ौफ़े-रुसवाई तो बेशक मेरा नाम मत लिया करो,
बात न भी करो तो नज़र-नज़र में  सलाम कर लिया करो।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-220

6.1.23

S-219 मंज़िल मिल ही जाए

मंज़िल मिल ही जाए ये ज़रूरी नहीं,
मगर इसकी जुस्तजू छोड़ी नहीं जाती।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" S-219

4.1.23

P-185 हर बार,

हर बार, बार-बार करेंगे हम इंतज़ार तेरा,
अभी तो सिर्फ़ एक ही ज़िन्दगी गुज़री है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-185

2.1.23

P-184 तेरा प्यार है

तेरा प्यार है अगर बेशकीमती शय, तो बेशक न दे मुझे,
मैं मामूली इंसाँ हूँ, कीमती चीज़े संभाल भी नहीं सकता।

-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी" P-184

S-218 आंधी तूफाँ भी

आंधी तूफाँ भी सर झुकाए निकल जाते हैं,
बुझा सका है कौन चिरागे-मुहब्बत को।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-218

S-217 नए साल का क्या

नए साल का क्या कीजे "अजनबी",
सदियों से हिज्र में हम जिए जा रहे हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-217

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...