21.1.23

S-223 दुश्मनों को भी

 दुश्मनों को भी आ जाता है रहम कभी-कभी,

अपनों में मगर ये गुंजाइश भी नहीं हुआ करती।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-223

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