22.1.23

M-047 मतलब ने ही

मतलब ने ही जोड़ा था,
वोही अब मिलाऐगा भी।
मतलब ने ही तोड़ा था,
वोही फिरसे जोड़ेगा भी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-047

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...